अनुच्छेद 371 क्या है  what is article 371 in hindi 

what is article 371 in hindi अनुच्छेद 371 क्या है

अनुच्छेद 371 क्या है  what is article 371 in hindi 

what is article 371 in hindi  हम सभी जानते है कि हाल ही में दिनांक 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया। 370 के समाप्त होने से article 35A भी समाप्त हो गया। लेकिन क्या आप को पता है जम्मू- कश्मीर के अतिरिक्त भी कुछ ऐसे राज्य है जिन्हें विशेष अधिकार प्राप्त है।

 हमारे प्यारे भारत में जम्मू–कश्मीर के अतिरिक्त 11 ऐसे राज्य भी है जहाँ विशेष अधिकार वाली धाराएँ लागू है जोकि केंद्र सरकार को विशेष अधिकार देती है।

जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 व 35A समाप्त कर दिया। तो इसके बाद संसद सदन में लोगो ने अनुच्छेद 371 पर भी सवाल करने शुरू कर दिए। क्योंकि देश में 11 ऐसे राज्य भी है।

जिन्हें अनुच्छेद 371 को लागू करके  इन राज्यों को भी जम्मू और कश्मीर की तरह ही विशेष अधिकार दिए गए है। ये अधिकार केंद्र सरकार को विकास, सुरक्षा जैसे अन्य कार्यों को करने की ताकत देती है।

वो 11 राज्य जहाँ धारा 371 लागू है –

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गुजरात और महाराष्ट्र – article 371

महाराष्ट्र और गुजरात, इन दोनों राज्यों के राज्यपाल को article 371 विशेष अधिकार प्राप्त है कि वो गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र और महाराष्ट्र के मराठवाडा और विदर्भ के के विकास के लिए एक अलग विकास बोर्ड बना सकते है। तथा इन इलाकों के विकास के लिए दोनों राज्यों को बराबर फंड दिया जायेगा।

इन राज्यों के Technical Education & Vocational Training तथा रोज़गार के लिए राज्यपाल विशेष व्यवस्था कर सकता है।

नागालैंड – article 371A – 13वां संशोधन एक्ट- 1962

नागालैंड में article 371A के तहत ज़मीन के हक़ को लेकर नागा समुदाय के परम्परिक प्रथाओं, नागरिक, शासकीय और आपराधिक न्याय सम्बन्धी नियमों को संसद नही बदल सकती है।

केंद्र सरकार इन मुद्दों पर तभी फैसला ले सकती है जब राज्य की विधान सभा कोई कानून लेकर आये।  धारा 371A को उस वक्त लागू किया गया जब भारत सरकार और नागा समुदाय के लोगो के बीच में समझौता हुआ।

असम – 371B – 22वां संशोधन एक्ट- 1969

धारा 371B के अंतर्गत राष्ट्रपति को ये अधिकार है कि वो आदिवासी इलाकों से चुनकर आये विधानसभा के प्रतिनिधि की एक कमेटी बना सकते है। ये कमेटी राज्य के विकास संबंधी कार्यों के रिपोर्ट को राष्ट्रपति तक पहुँचाते है।

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मणिपुर – 371C – 27वां संशोधन एक्ट-1971

मणिपुर में article 371 C के तहत एक विशेष अधिकार प्राप्त है जिसके अंतर्गत राष्ट्रपति चाहे तो राज्य के राज्यपाल को एक विशेष ज़िम्मेदारी देकर विधान सभा से चुनकर आये प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनवा सकता है।

ये कमेटी राज्य से विकास और अन्य कार्यों की रिपोर्ट राज्यपाल को देंगे और राज्यपाल ये रिपोर्ट राष्ट्रपति को देंगे।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना – 371D , 32वां संशोधन एक्ट-1973

धारा 371D के तहत आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को विशेष अधिकार प्रदान किया गया है कि इन दोनों राज्यों के लिये राष्ट्रपति के पास अधिकार है कि वो राज्य सरकार आदेश दे कि किस नौकरी में किस वर्ग के लोग को नौकरी दी जाएगी।

इसके अतिरिक्त इसी प्रकार शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण भी प्रदान किये जाते है। इन राज्यों के नागरिकों के सेवाओं से जुड़े मुद्दों के लिए राष्ट्रपति हाईकोर्ट से अलग ट्रिब्यूनल भी बनवा सकते है।

सिक्किम – 371F – 36वां संशोधन एक्ट – 1975

इस विशेष अधिकार के अंतर्गत राज्य के विधानसभा के प्रतिनिधि मिला कर ऐसे प्रतिनिधि चुन सकते है जो राज्य के विभिन्न समुदाय के लोगो के अधिकारों और उनकी रुचियों का ख्याल रखते है। इसके अंतर्गत संसद कुछ विधानसभा की सीटों को तय कर सकता है।  जिससे विभिन्न समुदाय के लोग चुनकर आएँगे।

इस राज्य से राज्यपाल के पास विशेष अधिकार होता है जिसके तहत वे सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बराबर व्यवस्थाएं किया जा सके। साथ ही राज्य के विभिन्न वर्गों के विकास के लिए प्रयास करेंगे। राज्यपाल के फैसले पर किसी भी कोर्ट में अपील नहीं की जा सकेगी।

मिज़ोरम 371G – 53वां संशोधन एक्ट-1986

मिज़ोरम में article 371G के तहत ज़मीन के हक़ को लेकर मिजो समुदाय के परम्परिक प्रथाओं, नागरिक, शासकीय और आपराधिक न्याय सम्बन्धी नियमों को संसद नही बदल सकती है।

केंद्र सरकार इन मुद्दों पर तभी फैसला ले सकती है जब राज्य की विधान सभा कोई कानून लेकर आये।

अरुणाचल प्रदेश 371H- 55वां संशोधन एक्ट- 1986

अरुणाचल प्रदेश में धारा 371H के तहत राज्य के राज्यपाल को कानून और सुरक्षा संबंधी कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते है।

राज्यपाल अपने फैसले को मंत्रियों की परिषद में चर्चा करके लागू कर सकता है।किंतु चर्चा के दौरान कोई भी राज्यपाल के फैसले पर सवाल नही उठा सकता। किसी भी फैसले में राज्यपाल का फैसला अंतिम फैसला होगा।

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कर्नाटक – आर्टिल 371J98वां संशोधन एक्ट-2012

आर्टिकल 371J के तहत हैदराबाद और कर्नाटक  को विशेष अधिकार है कि वो अलग से विकास बोर्ड बना सकते है। इस विकास बोर्ड की सालाना रिपोर्ट को विधानसभा में पेश की जाएगी, जिससे विकास कार्यों के लिए अलग से फंड दिया जायेगा। जोकि दोनों राज्यों में बराबर से बाँटा जायेगा।

इन क्षेत्र के लोगो को सरकारी नौकरियों में बराबर हिस्सेदारी मिलती है। इसके अंतर्गत हैदराबाद और कर्नाटक सरकार यहाँ के लोगो को बराबर आरक्षण प्रदान करती है

इसके बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए सरकारी वेबसाईट पर जाये – https://mha।gov।in/hi/division_of_mha/संविधान-का-अनुच्छेद-371-2

 

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