Cinderella Story in Hindi

 Cinderella Story in Hindi | सिंड्रेला की कहानी

सिंड्रेला की कहानी  Cinderella Story in Hindi

Cinderella Story in Hindi:  दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको सिंड्रेला की कहानी के बारे में बताने वाले है। ये रोचक कहानी स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए है। वो इससे कहानी को पढ़ कर सीख सकते है कि हमें कभी हार नही माननी चाहिए और हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए।

Cinderella Story in Hindi

एक समय की बात है, एक राज्य में एक व्यापारी रहता था। उसकी एक छोटी और प्यारी सी बेटी थी, जिसका नाम एला था। जो बाद में सिंड्रेला के नाम से प्रसिद्ध हुई।

चूँकि एला के पिता एक बड़े व्यापारी थे, इसलिए वे अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहरों में आना जाना लग रहता था। सिंड्रेला के पिता बहुत ही दयालु किस्म के व्यक्ति थे, इसलिए वे अपनी पुत्री से बहुत प्यार करते थे।

एला जब छोटी थी, तो उसकी माँ का देहांत हो गया था। इसलिए उसे माँ का प्यार नही मिल पा रहा था। इसलिए उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। जिससे उसके न होने पर एला अकेली न हो और उसे माँ का प्यार मिलता रहे।

एला के पिता ने एक विधवा महिला के साथ शादी की थी और उसकी दो बेटियां भी थी।

कुछ समय बीतने के बाद एक दिन एला के पिता व्यापार के सिलसिले में शहर गए थे लेकिन वहां पर उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई।

पिता की मृत्यु के बाद एला की जिन्दगी पूरी बदल गई। क्योंकि उसकी सौतेली माँ ने सारी संपत्ति अपने नाम करवा लिया और एला के साथ नौकरों जैसा बर्ताव करने लगीं।

कुछ समय के बाद एला की सौतेली माँ ने सारे नौकरों को निकाल दिया और सारा का एला से करवाने लगी। उसकी सौतेली माँ उसके मरती पिटती थी और उसे ताने भी मारती थी।

उसकी सौतेली बहनें उसे पसंद नहीं करती थी। वो हमेशा एला को अपने आप से दूर रखती थी और उससे अपना सारा काम( कपड़े धोना, नाश्ता बनाना, जूते पॉलिश, कमरे की साफ सफाई इत्यादि) करवाती थी।

एला सारे काम करके बहुत थक जाती थी और घर की चिमनी के पास सो जाती थी, जिससे उसके ऊपर चिमनी की राख गिर जाती थी। इसे अंग्रेजी में सिंडर कहते है।

एला की सौतेली बहाने एला को देखकर सिंडर-एला कहकर चिढाती थी और उसका मजाक उड़ाती थी। जो बाद में सिंड्रेला बन गया और एला का नाम सिंड्रेला पड़ गया।

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सिंड्रेला पिता के देहांत के बाद बिलकुल अकेली पड़ गई थी क्योंकि उसकी सौतेली माँ और बहने उससे बात नही करती थी। इसलिए सिंड्रेला ने एक चिड़िया और दो चूहों को अपना दोस्त बना लिया था।

धीरे-धीरे समय बिता और सिंड्रेला बड़ी हो गई। जिस राज्य में सिंड्रेला रहती थी। उस राज्य के राजा ने पूरे राज्य में एलान करवाया कि राजमहल में एक बहुत बड़े जलसे का आयोजन होने वाला है। जिसमें राज्य की सारी लड़कियों को आमंत्रित किया गया था।

वहन आने वाली लड़कियों में राजकुमार अपने लिए राजकुमारी चुनने वाला था। इस एलान के बाद राज्य की सारी लड़कियों के मन राजकुमार के साथ विवाह के सपने देखने लगी।

इस एलान को सुनने के बाद सिंड्रेला भी बहुत खुश हुई, लेकिन उसकी सौतेली माँ बहुत ही खडूस थी और वो नही चाहती थी कि सिंड्रेला उस जलसे में जाए। क्योंकि वो बहुत ही सुंदर और ख़ूबसूरत थी। वो फटे और गंदे कपड़ों में भी किसी राजकुमारी से कम नही लगती थी।

जबकि सिंड्रेला की दोनों सौतेली बहने चाहे जितने अच्छे कपड़े, आभूषण पहन ले वो बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती थी। जिससे उसकी सौतेली माँ को डर था कि अगर सिंड्रेला महल पहुँच गई, तो राजकुमार उसकी बेटियों को पसंद नही करेंगा।

आखिर वो दिन आ गया। महल के जलसे में शामिल होने के लिए सिंड्रेला ने घर का काम ख़त्म करके अपनी सौतेली माँ से महल के जलसे में जाने के लिए आज्ञा लेने आई।

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सिंड्रेला की दोनों बहाने तैयार हो रही थी, उसकी सौतेली माँ ने सिंड्रेला की तरफ देखा और उससे कहा, तुम भी जलसे में जा सकती हो लेकिन एक शर्त है। तुम्हे घर की साफ़ सफाई फिर से करनी होगी। ये बात सुनकर सिंड्रेला खुश हो गई। लेकिन कुछ देर बाद उसकी सौतेली माँ ने उसे फिर बुलाया और अपनी दोनों बेटियों के सारे कपडे धोने को दे दिया। इससे सिंड्रेला को बहुत गुस्सा आया लेकिन वो कर भी क्या सकती थी।

उसके पास कोई और रास्ता नही था इसलिए वो घर का काम करने लगी। शाम हो गई उसकी दोनों सौतेली बहने तैयार होकर महल के जलसे में जाने लगी। सिंड्रेला ने पीछे से आवाज दिया मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी। क्योंकि मैंने अपना सारा काम कर लिया है।

तभी उसकी सौतेली माँ ने नई चाल चली। उसने सिंड्रेला से कहा, औ अपने नए कपडे पहन लो फिर जाओ। ये बात सुनकर वो खुश हो गई। जैसे ही सिंड्रेला अपने कमरे में गई उसकी सौतेली माँ ने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया, और राजमहल की चल पड़ी।

सिंड्रेला तैयार होकर दरवाजे के पास आई, तो उसे पता चला कि दरवाजा बाहर से बंद है। उसने अपनी माँ को खूब आवाज लगाई लेकिन किसी ने दरवाजा नही खोला। वो समझ गई कि उसकी सौतेली माँ उसे महल नही ले जानाचाहती है। इस बात से वो वहीँ बैठ कर रोने लगी।

सिंड्रेला बहुत दुखी थी। वो घर के एक कोने में बैठ कर रो रही थी। तभी अचानक से कमरे में एक रोशनी चमकने लगी। जिससे उसकी आँखे चौधियां गई। जब उसने अपने आँखे खोली  तो उसके सामने एक परी खड़ी हुई थी। उसके अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था।

सिंड्रेला को उदास देखकर परी ने उससे उदासी का कारण पूछा, तो सिंड्रेला ने अपनी पूरी कहानी सुनाई। इस पर परी ने सिंड्रेला से कहा, बस बस इतनी सी बात।।।

परी ने सिंड्रेला से पूछा तुम जलसे में जाना चाहती हो?

सिंड्रेला ने जवाब दिया मैं जाना तो चाहती हूँ लेकिन नही जा सकती।

परी ने पूछा क्यों नही जा सकती हो?

इस पर सिंड्रेला ने जवाब दिया, मैं अगर किसी तरह से राजमहल पहुंच भी जाऊं, तो वहां से सिपाही उसे अंदर नहीं जाने देंगे। क्योंकि मेरे पास कोई अच्छा कपड़ा नहीं है और मेरे पास कोई भी आभूषण नहीं है।

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सिंड्रेला की बात सुनकर परी ने मुस्कुराते हुए, उसके ऊपर अपनी जादुई छड़ी घुमाई। अगले ही क्षण सिंड्रेला बिलकुल बदल गई। उसने नये कपडे पहन लिए थे। आभूषण और कांच की नई सैंडल। इन कपड़ो में सिंड्रेला बहुत सुंदर लग रही थी।

अपने आपको इतने अच्छे कपड़ो में देखकर सिंड्रेला ख़ुशी से नाचने लगी।

चूँकि बहुत समय बीत गया था, और राजमहल में समय पर पहुंचने के लिए बहुत कम समय बचा था। इसलिए परी ने अपने जादू से कद्दू को एक खूबसूरत बग्गी में बदल दिया। परी ने सिंड्रेला के चूहे दोस्त को घोड़ा बना दिया और नन्ही चिड़िया को कोचवान बना दिया।

सिंड्रेला जलसे में जाने के लिए तैयार थी। तभी पारी ने उसे चेतावनी दी कि तुम्हे 12:00 बजे से पहले अपने घर वापस आना होगा क्योंकि 12:00 बजे के बाद मेरा ये जादू अपने आप समाप्त हो जाएगा और तुम फिर से अपने पुराने कपड़ों में आ जाओगी।

सिंड्रेला ने परी से वादा किया कि वो 12 बजे से पहले घर वापस आ जायेगी।

जब सिंड्रेला वहां पहुंची तो सौतेली मां और बहने उसे देखकर हैरान रह गई। राजकुमार ने जैसे ही सिंड्रेला को देखा वो उससे अपनी नजरें नही हटा पा रहा था।

वो तुरंत ही सिंड्रेला के पास गया और सिंड्रेला से नृत्य के लिए पूछा। इससे खुश होकर सिंड्रेला ने  राजकुमार के साथ डांस के लिए मान गई और वो उसके साथ डांस करने लगी। राजकुमार ने पूरी शाम सिंड्रेला के साथ डांस किया। ये देखकर उसकी सौतेली माँ और दोनों बहने और अन्य लड़कियां उससे ईर्ष्या करने लगी।

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राजकुमार के साथ वो इतनी ख़ुशी थी कि वो भूल गई कि उसे 12 घर वापस जाना है। जैसे ही रात के 12 बजे का घंटा बजा सिंड्रेला को परी की बात याद आ गई।

वो जल्दी से वहा से भागी, राजकुमार भी उसके पीछे भागने लगा। क्योंकि शायद राजकुमार को उससे प्यार हो गया था। और वो सिंड्रेला से विवाह करना चाहता था।

भागते हुए सिंड्रेला की कांच की सैंडल सीढियों पर टूट गई लेकिन फिर भी वो नही रुकी। वो अपनी बग्गी पर बैठ कर अपने घर चली आई।

घर पहुँचते पहुँचते उसके कपडे फिर से पुराने हो गए। राजकुमार सिंड्रेला को भुला नहीं पा रहा वो उसकी जूती के लिए परेशान था। राजकुमार सिंड्रेला से प्यार हो गया था और ठान लिया कि वह पूरे राज्य में सिंड्रेला को ढूंढेगा। लेकिन उसें न ही सिंड्रेला के घर का पता था और न उसका नाम पता था।

अगले दिन राजकुमार ने पूरे राज्य में ऐलान करवा दिया कि इस राज्य की जिस भी लड़की के पैर में कांच की सैंडल आ जाएगी उससे वो शादी कर लेगा।

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उस राज्य की सभी लड़कियों के साथ उसकी दोनों सौतेली बहनों ने भी जूती पहनने की कोशिश की, लेकिन किसी को भी सैंडल नही हुआ।

अंत में सिंड्रेला ने उस कांच की जूती को पहनकर देखा। तो उसके परों में वह जूती आराम से आ गई। इस खबर को सेवकों ने राजकुमार तक पहुँचाया।

ये खुशखबरी सुनकर राजकुमार सिंड्रेला के पास दौड़ा चला आया।सिंड्रेला भी इससे बहुत खुश थी लेकिन उसकी सौतेली माँ और बहने इस बात से खुश नही थी।

उसके बाद राजकुमार ने सिंड्रेला के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। सिंड्रेला ने ख़ुशी से विवाह के लिए हाँ कर दिया। कुछ समय बाद दोनों का विवाह हो गया और दोनों ख़ुशी से अपना जीवन महल में बिताने लगे।

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